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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 53
न्यासोऽवयवसंस्पशों भोजनं हवनक्रिया ॥ वीक्षणं ध्यानमीशानि शयनं वन्दनं भवेत् ।
हे ईशानि! अङ्गों का स्पर्श न्यास, भोजन हवन की क्रिया, देखना ध्यान और सोना बन्दनास्वरूप होता है।
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