उस समय का वार्तालाप जपफल होता है, तन्द्रा समाधि होती है, हे देवि! भैरवी बलि देने पर विशेष क्रियायें पूजा है, शक्ति संयोग मोक्ष होता है और उस समय का भाषण स्तोत्र होता है।
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