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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 52
जल्पो जपफलं तन्द्रा समाधिरभिजायते । विक्रिया पूजनं देवि उदितं भैरवीबलिः ॥ मुक्तिः स्याच्छक्तिसंयोगः स्तोत्रं तत्कालभाषितम् ।
उस समय का वार्तालाप जपफल होता है, तन्द्रा समाधि होती है, हे देवि! भैरवी बलि देने पर विशेष क्रियायें पूजा है, शक्ति संयोग मोक्ष होता है और उस समय का भाषण स्तोत्र होता है।
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