चक्र में सम्मिलित साधकों द्वारा अपनी अभीष्ट चेष्टा का करना 'प्रौढान्त' उल्लास कहा गया है। हे देवि! इस उल्लास से योगी और योगिनीमण्डल के प्रमुदित होने पर क्रमशः आनन्द होता है और उन उल्लासित वीरों में कार्याकार्य का विचार नहीं रहता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।