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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 5
समुल्लासपरे चक्रे य इच्छेत् पात्रमेलनम् । अर्वाक् प्रौढसमुल्लासं नैव कुर्यात् कदाचन । यथाधिकारं तत्रापि कर्त्तव्यं पात्रमेलनम् ॥
चक्र में समुल्लास की स्थिति होने पर यदि पात्रमेलन की इच्छा हो, तो कभी भी पहले प्रौढ उल्लास न करे और अधिकार के अनुसार ही पात्रमेलन करे।
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