द्वारस्था मणिमण्डपस्य परितः श्रीनन्दने कानने शून्यागारविहारकन्दरमठे व्योम्नि श्मशाने स्थिताः ।
कूपस्थानगताश्चतुष्पथगताः सन्देशसंस्थाश्च ये पङ्कार्थावहकेतुमानकुसुमात् गृह्णन्तु ते पान्तु च ॥
द्वार पर निवास करने वाले, श्रीनन्दन के उद्यान में मणिमण्डप के चारों ओर स्थित, शून्य गृह में, विहार एवं कन्दरा तथा मठ (देवालय) में, आकाश में, श्मशान में स्थित देव, कूपस्थान में, चौराहे पर रहने वाले, सम्यक् प्रदेश में निवास करने वाले, पर्यङ्क (पलंग) पर, वायु में, झण्डे या बुर्जियों पर तथा फूलों में रहने वाले तदभिमानी देवगण मेरे यज्ञ को ग्रहण करे तथा मेरी रक्षा करें।
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