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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 44
यासामाज्ञाप्रभावेण स्थापितं भुवनत्रयम् । नमस्ताभ्यः समस्ताभ्यो योगिनीभ्यो निरन्तरम् ॥
जिन (शक्ति) की आज्ञा के प्रभाव से तीनों लोक प्रतिष्ठित हुए उन समस्त योगिनियों को निरन्तर नमस्कार है।
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