सभी साधक गण प्रसत्र होंवे। कुलधर्म को दूषित करने वाले पाखण्डियों का विनाश होवे। मुझमें शम्भु से सम्बन्धित अवस्था (शाम्भवी मुद्रा) हो और मेरे गुरु सदैव प्रसन्न रहें।
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