सत्यश्चेद् गुरुवाक्यमेव पितरो देवाश्च चेद् योगिनी प्रीता चेत् परदेवता यदि भवेद्वेदाः प्रमाणं हि चेत् ।
शाक्तेयं यदि दर्शनं भवति चेदाज्ञाप्यमोघापि चेत् संत्यञ्चापि च कौलधर्मपरमं स्यान्मे जयः सर्वदा ॥
यदि गुरुवाक्य सत्य है, पितर, देव, आगम एवं योगिनी सत्य है, यदि परदेवता प्रसन्न है और यदि वेद प्रमाण है, यदि शाक्त दर्शन सत्य है, यदि (गुरु या शक्ति की) आज्ञा अमोध है तो कौल धर्म भी सत्य है अतः मुझ कौल की सर्वदा जय होए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।