ब्रह्मा, लक्ष्मी, शेषनाग, दुर्गा, कार्तिकेय, बटुकगण, भैरव एवं क्षेत्रपाल आदि, रुद्र, आदित्य, ग्रह, वसु पितर, मुनिगण, सिद्ध तथा गुह्यक आदि, भूत, गन्धर्व विद्याधर, ऋषि, पितर, किन्नर, यक्ष एवं नाग योगीश एवं चारण आदि, सुरश्रेष्ठ के समूह हमारे पूजन में सन्तुष्ट होवें।
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