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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 37
या देव्यः कुलसम्भवाः क्षितिगता या देवतास्तोयगा या नित्यं प्रथितप्रभाः शिखिगता या मातरिश्वालयाः । या व्योमाहितमण्डलामृतमया याः सर्वगाः सर्वदा-स्ताः सर्वाः कुलमार्गपालनपराः शान्ति प्रयच्छन्तु मे ॥
जो कुल (धर्म) में उत्पन्न देवियाँ हैं, जो आकाश एवं जल में निवास करने वाली देवियाँ है जो नित्य एवं प्रसन्न प्रभा से युक्त निधि में रहने वाली हैं और जो जो पृथ्वी पर प्रकृष्ट रूप से स्थित है, जो आकाश में स्थित बादलरूपी अमृत से युक्त है, जो देवियों सर्वदा सभी स्थानों में सर्वत्र गमन करने वाली हैं, वे कुलमार्ग के पालन में परायण देवियाँ मुझे शान्ति प्रदान करें।
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