जो देवी (श्री) चक्र में, (पूजा) क्रम में, भूमिका (भूपुर) में वास करने वाली एवं नाड़ियों में निवास करने वाली देवियाँ हैं, जो देवियाँ शरीर के रोमकूपों में तथा (मांस मज्जा आदि) धातुओ में विराजमान हैं, उच्छ्वास एवं निःश्वास रूपी प्राणवायु की महान् तरङ्गों में निवास करने वाली देवियाँ है, वे कौलों द्वारा अर्चित शत्रु पक्ष का भक्षण करते हुए मेरे मन्त्रों से पूजित होकर मेरे यज्ञ में तृप्त होवें।
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