योग में संलग्न और कुल योग (शक्ति उपासक) से युक्त जन आनन्दित होवें। आचार्य और सामयिक साधक के पुत्र प्रसत्र होऐं। गाएँ, द्विज, युवतियाँ, सन्यासी और कुमारियाँ कुल धर्म में प्रवृत्त हों तथा गुरुभक्त लोक कुलधर्म में परायण हों।
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