नीति निपुण एवं निरवद्यनिष्ठ, निर्मत्सर, उपमारहित, उपद्रवों से रहित कुल साधक प्रसन्न होएँ। नित्य शिव में आसक्त, इच्छारहित गुरु गण शान्त मन वाले होऐं। हृदय के शोक की शङ्का भी न रहे और सभी चराचर जगत् शान्ति प्राप्त करें।
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