सिद्धगुरु गण और उनके अनुक्रम के ज्ञाता साधक, ज्येष्ठ सन्तान, समयाचार का पालन करने वाले, बटुक तथा कुमारियाँ आनन्दित होवें। जो वीर कुल (सम्प्रदाय) में जन्म लेने वाले योगिनियों के श्रेष्ठ उपासक हैं, पृथ्वी के स्वामी (राजा), गो, द्विज एवं समस्त सज्जनों का सम्प्रदाय प्रसत्र होए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।