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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 32
नन्दन्तु सिद्धगुरवस्तदनुक्रमज्ञा ज्येष्ठान्वया समयिनो वटुकाः कुमार्यः । ये योगिनीप्रवरवीरकुले प्रसूता नन्दन्तु भूमिपतिगोद्विजसाधुलोकाः ॥
सिद्धगुरु गण और उनके अनुक्रम के ज्ञाता साधक, ज्येष्ठ सन्तान, समयाचार का पालन करने वाले, बटुक तथा कुमारियाँ आनन्दित होवें। जो वीर कुल (सम्प्रदाय) में जन्म लेने वाले योगिनियों के श्रेष्ठ उपासक हैं, पृथ्वी के स्वामी (राजा), गो, द्विज एवं समस्त सज्जनों का सम्प्रदाय प्रसन्न होए।
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