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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 31
नन्दन्तु साधककुलाद्वयदर्शका ये सिंहासनाद्युषितशाक्तमहान्वया ये । नन्दन्तु सर्वकुलकौलरताः परे ये चान्ये विशेषपदभेदकशाम्भवा ये ॥
जो साधक कुल के अद्वितीय दर्शक हैं एवं जो सिंहासनादि पर आसीन महाकुलीन (शाक्त) हैं वे आनन्दित होवें। अन्य सभी कुल में संलग्न कौल तथा जो विशेष (मोक्ष) पद के भेदक शम्भु के उपासक हैं वे प्रसन्न होएं।
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