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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 28
आपदो दुरितं रोगाः समयाचारलंघनात् । ये ते सर्वे व्यपोहन्तु दिव्यचक्रस्य मेलनात् ॥
समयाचार के उल्लंघन से ही आपत्ति, पाप एवं रोग होते हैं। वे सभी बाधाएँ दिव्य (श्री) चक्र के मेलन (पूजन) से समाप्त हो जायें।
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