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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 27
अनादिघोरसंसारध्वान्तैकध्वंसकारिणे । नमः श्रीनाथवैद्याय कुलौषधिविधायिने ॥
कुल (शक्ति) रूप (भव रोग के लिए) औषधि का विधान करने वाले अनादि एवं घोर संसार (की आसक्ति) को नष्ट करने वाले श्री नाथ रूप वैद्य के लिए नमस्कार है।
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