मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 25
यजन्ति देव्यो हरपादपङ्कजम् प्रसन्नधामामृतमोक्षदायकम् । अनन्तसिद्धान्तमयप्रबोधकं नमामि चाष्टाष्टकयोगिनीगणम् ॥
जो योगिनी देवियाँ भगवान् शङ्कर के चरण कमल की पूजा किया करती है, प्रसन्न, (शङ्कर के) बाम भाग में स्थित, मोक्ष प्रदान करने वाली, अनन्त सिद्धान्तों में प्रवेश के लिए बुद्धि का प्रबोधन करने वाली चौंसठ योगिनियों के समूह को मैं प्रणाम करता हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें