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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 24
तारत्रयं समुच्चार्यं पश्चादुच्छिष्टभैरवम् । एहियुग्मं बलिं गृह्मणयुग्मं फट् च द्विठान्तकः ॥ बल्युद्वासनमन्त्रोऽयं द्वाविंशतिभिरक्षरैः । शान्तिस्तवं पठेत्पश्चात्तर्पयेदलिबिन्दुभिः ॥
तीन तार अर्थात् ॐ ॐ ॐ का उच्चारण कर 'उच्छिष्ट भैरव' कहे। फिर दो बार 'ऐहि' पद और दो बार 'गृण' पद कहकर फट् एवं स्वाहा कहे। यह २२ अक्षरों का बलि प्रदान करने का मन्त्र है। विमर्श - इस प्रकार निम्न २२ अक्षरों वाले मन्त्र से बलि प्रदान करे:- ॐ ॐ ॐ उच्छिष्टभैरव एहि एहि बलिं गृह्मण गृहण फट् स्वाहा। तदनन्तर 'शान्तिस्तव' का पाठ कर अलि (मद्य) बिन्दुओं से तर्पण करे।
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