हे कुलेशानि! प्रौढोल्लास होने पर पूजागृह से बाहर या गृह के भीतर एक त्रिकोण बनाकर गन्धपुष्पाक्षतों से उसकी पूजा कर गदा, त्रिशूल, डमरु और पात्र हाथ में लिए हुए त्रिलोचन एवं कृष्ण वर्ण के सभी विघ्नों का निवारण करने वाले उच्छिष्टभैरव का ध्यान करना चाहिए।
यथा-
गदात्रिशूलडमरुपात्रहस्तं त्रिलोचनम् ।
कृष्णाभं भैरवं ध्यायेत् सर्वविघ्ननिवारणम् ।।
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