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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 23
प्रौढोल्लासे कुलेशानि कुर्याद्बलिविसर्जनम् । पूजागृहाद्बहिः कुर्यात्त्रिकोणे तु गृहान्तरे ॥ गन्धपुष्पाक्षतैः पूज्य ध्यायेदुच्छिष्ट भैरवम् । गदात्रिशूलडमरुपात्रहस्तं त्रिलोचनम् । कृष्णाभं भैरवं ध्यायेत् सर्वविघ्ननिवारणम् ॥
हे कुलेशानि! प्रौढोल्लास होने पर पूजागृह से बाहर या गृह के भीतर एक त्रिकोण बनाकर गन्धपुष्पाक्षतों से उसकी पूजा कर गदा, त्रिशूल, डमरु और पात्र हाथ में लिए हुए त्रिलोचन एवं कृष्ण वर्ण के सभी विघ्नों का निवारण करने वाले उच्छिष्टभैरव का ध्यान करना चाहिए। यथा- गदात्रिशूलडमरुपात्रहस्तं त्रिलोचनम् । कृष्णाभं भैरवं ध्यायेत् सर्वविघ्ननिवारणम् ।।
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