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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 21
उच्छिष्टं भक्षयेत् स्त्रीणां ताभ्यो नोच्छिष्टमर्पयेत् । चक्रमध्येऽपि देवेशि अन्यथा पतनं भवेत् ॥
स्त्रियों का उच्छिष्ट तो खाये। किन्तु हे देवेशि! उन्हें अपना उच्छिष्ट चक्र में भी न दे। अन्यथा पतन होता है।
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