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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 17
योगिभिर्योगिनीभिश्च प्रदत्तं पूर्णपात्रकम् । स्वमातृपादुकामूलमन्त्रजप्तं पिबेत्प्रिये ॥
हे प्रिये! योगियों और योगिनियों द्वारा प्रदत्त पूर्ण पात्र को अपनी मातृका और मूलमन्त्र से अभिमन्त्रित कर पान करे।
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