स्रोतोभेदेन वा कुर्यात्कौलिकः पात्रमेलनम् ।
पूर्वदक्षिणयोरैक्यमुदक्पश्चिमयोस्तथा ॥
स्रोत भेद से अर्थात् आम्नाय के विभागों के अनुसार कौलिक को पात्र की सङ्गति करनी चाहिये। पूर्व और दक्षिण, उत्तर और पश्चिम आम्नायों में ऐक्यभाव है।
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