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कुलार्णव • अध्याय 8 • श्लोक 11
अदृष्टपौरुषाणाञ्च देशान्तरनिवासिनाम् । विना सङ्केतयोगेन न कुर्याद् द्रव्यसङ्गतिम् ॥
दूसरे देश के निवासियों के साथ, जिनका परिचय अज्ञात है, द्रव्यसङ्गति तब तक न करे, जब तक 'संकेत' द्वारा 'योग' (ऐक्यभाव) न हो।
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