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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 86
इति ते कथितं देवि कुलाचारस्य लक्षणम् । गव्यसंस्कारशुद्ध्यादि किमन्यत् श्रोतुमिच्छसि ॥ इति श्रीकुलार्णवे निर्वाणमोक्षद्वारे महारहस्ये सर्वागमोत्तमोत्तमे सपादलक्षग्रन्थे पञ्चमखण्डे ऊर्ध्वाम्नायतन्त्रे द्रव्यसंस्कार-विधानकथनं नाम षष्ठोल्लासः ॥
इस प्रकार मैंने कुलाचार के लक्षण, द्रव्य, संस्कार एवं शुद्धि आदि को बताया। अब हे देवि! आप अन्य क्या सुनना चाहती है?
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