गुरुपंक्ति का ध्यान- निम्न प्रकार गुरु पंक्ति का ध्यान करे। यथा-
कराभ्यां चिन्मुद्रां समधुनृकपालं च दधतीं द्रुतस्वर्णप्रख्यामरुणकुसुमालेपवसनाम् ।
कृपापूर्णापाङ्गीमरुणनयनामम्बरजटा-मुपेतां तिस्स्रौधैर्यजतु गुरुपक्तिं कृतमतिः ।।
दोनों हाथों में चिन्मुद्रा धारण करने वाली, मधु के सहित नर कपाल लिए हुए, स्वर्ण के समान और अरुण वर्ण के पुष्पों का वस्त्र धारण करने वाली, कृपापूर्ण लाल-लाल नेत्रों वाली, अम्बर रूप जटा धारण करने वाली तीनों पक्ति से युक्त गुरुपङ्क्ति का साधक यजन करे।
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