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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 80
आगमोक्तेन मार्गेण तर्पयेदलिबिन्दुभिः । अङ्‌गुष्ठानामिकाभ्याञ्च नखे निःसृतमूर्ध्वतः । स्वपात्रस्पन्दनिस्यन्दं विधिवत् कुलनायिके ॥ सकृत्तर्पणमुत्सृज्य जप्त्वा मूलञ्च पादुकाम् । अन्तःशक्तिं समुत्थाप्य तर्पयेद्देहदेवताः ॥
देवतर्पण की विधि - हे कुलनायिके! आगमोक्त मार्ग से अलि (मद्य) बिन्दुओं से तर्पण करे। अपने पात्र में स्थित द्रव्य में से विधिवत अंगुष्ठ और अनामिका (तीसरी अंगुलि) इन दोनों के संयुक्त नख से द्रव्य ऊपर निकालकर मूल मन्त्र और पादुका का जप कर अन्तःशक्ति का स्मरण करते हुये देवताओं का तर्पण करे।
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