देवतर्पण की विधि - हे कुलनायिके! आगमोक्त मार्ग से अलि (मद्य) बिन्दुओं से तर्पण करे। अपने पात्र में स्थित द्रव्य में से विधिवत अंगुष्ठ और अनामिका (तीसरी अंगुलि) इन दोनों के संयुक्त नख से द्रव्य ऊपर निकालकर मूल मन्त्र और पादुका का जप कर अन्तःशक्ति का स्मरण करते हुये देवताओं का तर्पण करे।
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