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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 79
इत्यादिलक्षणं ज्ञात्वा गुरुतः शास्त्रतः प्रिये । विधिनाभ्यर्चयेत् सम्यग्देवता सुप्रसीदति ॥ षोडशैरुपचारैस्तु साङ्ग सावरणं शिवम् । पूजयेन्मूलमन्त्रेण गन्धपुष्पाक्षतादिभिः ॥ महाषोढोदिताशेषपरिवारांश्च शाम्भवि । प्रणवादिनमोऽन्तेन तत्तन्नाम्ना समर्चयेत् ॥
इन नियमों को गुरुदेव से और शास्त्र से जानकर, हे प्रिये! विधिपूर्वक सोलह उपचारों से अन्नों और आवरणों सहित शिव का अर्चन करे, तो देवता प्रसन्न होते हैं। हे शाम्भवि! मूलमन्त्र से गन्धपुष्पाक्षतादि के द्वारा महाषोढा में उल्लिखित समस्त परिवार का, प्रत्येक नाम के आदि में प्रणव (ॐ) और अन्त में 'नमः' लगाकर पूजन करे।
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