आवाह्य देवतामेकां पूजयेदन्यदेवताम् ।
उभाभ्यां लभते पापं मन्त्री चञ्चलमानसः ॥
एक देवता का आवाहन कर अन्य देवता का पूजन करने वाला चञ्चल मन साधक दोनों ही देवताओं का शाप प्राप्त करता है।
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