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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 77
एकपीठे कुलेशानि स्वे स्वे यन्त्रे पृथक्पृथक् । यजेदावरणोपेता देवतास्तद्विधानतः ॥
हे कुलेशानि! अतः एक पौठ में पृथक् देवताओं की पूजा उनके अलग यन्त्रों में उनकी पद्धति से उनके आवरणों के सहित अलग अलग करनी चाहिए।
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