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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 76
एकपीठे पृथक्पूजां विना यन्त्रं करोति यः । अङ्गाङ्गित्वं परित्यज्य देवताशापमाप्नुयात् ॥
यन्त्रपूजा की विधि - एक पीठ में पृथक् देवताओं की पूजा उनके यन्त्रों के बिना जो करता है, अङ्गाङ्गी भाव न होने से उस साधक को देवता का शाप मिलता है।
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