देवता मन्त्र और यन्त्र में ऐक्य - देवता, मन्त्र और यन्त्र की परस्पर व्यापकता को जाने बिना जो अर्चन आदि किया जाता है, वह सब हे शाम्भवि! व्यर्थ होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।