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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 70
तद्विधानकृतं कर्म जपहोमार्चनादिषु । देवताप्रीतिदं भूयाद् भुक्तिमुक्तिफलप्रदम् ॥
जप, होम, अर्चन आदि में उनकी विधिपूर्वक किये गए कर्म ही देवता को प्रसन्न करने वाले होते हैं और भुक्ति मुक्तिरूपी फलदायक होते हैं।
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