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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 68
नियमादतिरेकेण यद् यत् कर्म करोति यः । न किञ्चिदप्यस्य फलं सिध्यति क्रमदोषतः ॥
नियम से अतिरिक्त जो भी कर्म किया जाता है, उसका कोई भी फल क्रमदोष के कारण नहीं होता।
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