सकलीकृत्य तत्प्राणान् समुद्दीप्येन्द्रियाणि च ।
प्रतिष्ठाप्यार्चयेद्देवि चान्यथा निष्फलं भवेत् ॥
नियमपालन का महत्त्व - सकलीकरण कर, देवता के प्राणों और इन्द्रियों को समुद्दीप्त कर तथा प्राणप्रतिष्ठा कर अर्चन करे। हे देवि! अन्यथा कोई फल नहीं होता।
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