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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 64
गवां सर्वाङ्गजं क्षीरं स्त्रवेत् स्तनमुखाद् यथा । तथा सर्वगतो देवः प्रतिमादिषु राजते ॥
प्रतीक में पूजन करने का कारण - जिस प्रकार गायों के सारे शरीर में व्याप्त दूध उनके स्तन से स्स्रवित होता है, उसी प्रकार सर्वत्र व्याप्त देवता प्रतिमाओं आदि में विराजमान रहते हैं।
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