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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 60
ततः पीठं समभ्यर्च्य देवीमावाहयेत् प्रिये । महापद्मवनान्तः स्थे कारणानन्दविग्रहे । सर्वभूतहिते मातरेोहि परमेश्वरि ॥ देवेशि भक्तिसुलभे सर्वावरणसंयुते । यावत्त्वां पूजयामीह तावत्त्वं सुस्थिरा भव ॥
देवी के आवाहन का मन्त्र- हे प्रिये! तदनन्तर पीठपूजा कर देवी का आवाहन निम्न मन्त्र से करे:- महापद्मवनान्तः स्थे । कारणानन्दविग्रहे । सर्वभूतहिते ! मातरेोहि परमेश्वरि ।। देवेशि । भक्तिसुलभे ! सर्वावरणसंयुते । यावत् त्वां पूजयामीह तावत् त्वं सुस्थिरा भव ।।
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