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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 57
सिद्धौघे सनकश्चैव सनन्दश्च सनातनः । सनत्कुमारश्च सनत्सुजातश्च ऋभुक्षजः ॥ दत्तात्रेयो रैवतको वामदेवस्ततः परम् । ततो व्यासः शुकश्चैव एकादश समीरिताः ॥
सिद्धौघ प‌क्ति में - १. सनक, २. सनन्दन, ३. सनातन, ४. सनत्कुमार, ५. सनत्सुजात, ६. ऋभुक्षज, ७. दत्तात्रेय, ८. रैवतक, ९. वामदेव, १०. व्यास और ११. शुक - ये ग्यारह है।
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