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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 54
शुद्धद्रव्येण तेनापि गन्धपुष्पाक्षतैरपि । न्यासोक्तसर्वमन्त्रैश्चाप्यात्मानं पूजयेत् प्रिये ॥
इसके बाद उक्त प्रकार से शुद्ध किये गये द्रव्य से और गन्ध पुष्पाक्षतों से तथा न्यासोक्त सभी मन्त्रों से, हे प्रिये! अपनी पूजा करे।
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