पात्रशुद्धि की विधि - इस प्रकार, इन कलाओं, मातृका, अखण्डैक आदि मन्त्रों, अमृतेशी, दीपनी मन्त्रों और मूल मन्त्र का क्रमशः एक, दो, तीन, चार, पाँच और आठ बार स्मरण कर पात्र का पूजन कर उसे 'धेनुमुद्रा' दिखाए।
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