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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 48
विष्णुर्योनिं कल्पयतु पञ्चमः कल्पनामनुः । चतुर्नवतिमन्त्रात्मदेवता भावसिद्धिदाः ॥
ईश्वर कलाओं के बाद 'तद् विष्णोः' इत्यादि मन्त्र से और सदाशिव कलाओं के पूजन के बाद 'विष्णुयोंनिं' इत्यादि मन्त्र से पूजन करे। इन ९४ मन्त्रों से पूजन करने से मन्त्र, आत्मा और देवता के भाव की सिद्धि मिलती है।
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