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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 47
प्रथमं प्रकृतेर्हसः प्रतद्विष्णुरनन्तरम् । त्र्यम्बकन्तु तृतीयं स्याच्चतुर्थस्तत्पदादिकः ॥
तत्त्वसंस्कार के मन्त्र- ब्रह्म कलाओं के पूजन के बाद 'हंसः' इत्यादि मन्त्र से, विष्णु कलाओं के बाद 'प्रतद्विष्णु' इत्यादि मन्त्र से, रुद्र कलाओं के बाद 'त्र्यम्बकं' इत्यादि यजुः मन्त्र से,
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