मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 46
सूक्ष्मा सूक्ष्मामृता ज्ञानाऽमृता चाप्यायिनी तथा । व्यापिनी व्योमरूपा च षोडश स्वरजाः कलाः । सदाशिवभवा नादादनुग्रहकलाः क्रमात् ॥
१०. सूक्ष्मा, ११. सूक्ष्मामृता, १२. ज्ञाना, १३. अमृता, १४. आप्यायिनी, १५. व्यापिनी और १६. व्योमरूपा - ये स्वरों की सोलह अनुग्रहकलायें है, जो नाद से उत्पन्न हैं और सदाशिवजात हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें