सूक्ष्मा सूक्ष्मामृता ज्ञानाऽमृता चाप्यायिनी तथा ।
व्यापिनी व्योमरूपा च षोडश स्वरजाः कलाः ।
सदाशिवभवा नादादनुग्रहकलाः क्रमात् ॥
१०. सूक्ष्मा, ११. सूक्ष्मामृता, १२. ज्ञाना, १३. अमृता, १४. आप्यायिनी, १५. व्यापिनी और १६. व्योमरूपा - ये स्वरों की सोलह अनुग्रहकलायें है, जो नाद से उत्पन्न हैं और सदाशिवजात हैं।
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