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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 45
निवृत्तिश्च प्रतिष्ठा च विद्या शान्तिस्तथैव च । इन्धिका दीपिका चापि रेचिका मोचिका परा ॥
नाद से उत्पन्न सदाशिवजात १६ अनुग्रहात्मक कलाएँ - १. निवृत्ति, २. प्रतिष्ठा, ३. विद्या, ४. शान्ति, ५. इन्धिका, ६. दीपिका, ७. रेचिका, ८. मोचिका, ९. परा,
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