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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 44
घवर्गगाश्चतस्त्रः स्युः पीता श्वेतारुणासिताः । कलाश्चेश्वरसञ्जातास्तिरोधानाय बिन्दुजाः ॥
बिन्दु से उत्पन्न ईश्वरजात ४ तिरोधान कलायें - १. पीत, २. श्वेत, ३. अरुण और ४. असित - ये ष-वर्ग की ४ तिरोधानकलायें हैं, जो बिन्दु से उत्पन्न हैं और ईश्वरजात हैं।
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