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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 43
तीक्ष्ण रौद्री भया निद्रा तन्द्रा क्षुत् क्रोधिनी क्रिया । उत्कारी मृत्युरित्युक्ता पयवर्गकला दश । मकारप्रभवा रुद्रजाताः संहृतये कलाः ॥
मकार से उत्पन्न रुद्रजात १० संहार कलाएँ - १. तीक्ष्णा, २. रौद्री, ३. भया, ४. निद्रा, ५. तन्द्रा, ६. क्षुत्, ७. क्रोधिनी, ८. क्रिया, ९. उत्कारी और १०. मृत्यु-ये प-य वर्ग की १०. संहार कलाएँ है, जो मकार से उत्पन्न हैं और रुद्रजात है।
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