मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 42
जरा च पालिनी शान्तिरीश्वरी रतिकामिके । वरदाहलादिनीप्रीतिदीर्घाः स्युष्टतवर्गजाः । उकारप्रभवा विष्णुजाताः स्युः स्थितये कलाः ॥
उकार से उत्पन्न विष्णुजात १० स्थिति कलाएँ - १. जरा, २. पालिनी, ३. शान्ति, ४. ईश्वरी, ५. रति, ६. कामिका, ७. वरदा, ८. हलादिनी, ९. प्रीति और १०. दीर्घा - ये ट-त वर्ग की १० स्थितिकलाएँ हैं, जो उकार से उत्पन्न हैं और विष्णुजाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें