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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 41
सृष्टिर्मेधा स्मृतिऋद्धिः कान्तिर्लक्ष्मीद्युतिः स्थिरा । स्थितिः सिद्धिरिति प्रोक्ताः कचवर्गकला दश । अकारप्रभवा ब्रह्मजाताः स्युः सृष्टये कलाः ॥
ॐकार की कलाओं के नाम, अकार से उत्पन्न ब्रह्मजात १० सृष्टि कलाएँ - १. सृष्टि, २. मेधा, ३. स्मृति, ४. ऋद्धि, ५. कान्ति, ६. लक्ष्मी, ७. घुन्नि, ८. स्थिरा, ९. स्थिति और १०. सिद्धि ये कन्च वर्ग की १० सृष्टि कलाएँ हैं, जो अकार से उत्पन्न हैं और ब्रह्मजात है।
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