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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 40
धूम्रार्चिरुष्मा ज्वलिनी ज्वालिनी विस्फुलिङ्गिनी । सुश्रीः सुरूपा कपिला हव्यकव्यवहे अपि । आग्नेया यादिवर्णाद्या दश धर्मप्रदाः कलाः ॥
य से क्ष तक वर्णों की दस धर्मदायिनी अग्निकलायें - १. धूम्रार्चि, २. उष्मा, ३. ज्वलिनी, ४. ज्वालिनी, ५. विस्फुलिङ्गिनी, ६. सुश्री, ७. सुरूपा, ८. कपिला, ९. हव्यवहा और १०. कव्यवहा - ये अग्नि की धर्मप्रदा कलाएँ हैं, जो 'य' वर्ण से प्रारम्भ (क्ष पर्यन्त) होती हैं।
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