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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 39
तपनी तापिनी धूम्रा मरीचिर्ध्वालिनी रुचिः । सुषुम्ना भोगदा विश्वा रोधिनी धारिणी क्षमा । कभाद्या वसुदाः सौराष्ठडान्ता द्वादशेरिताः ॥
क-भ से ठ-ड तक वर्णों की वसुदायिनी बारह सूर्य कलाएँ - १. तपनी, २. तापिनी, ३. धूम्रा, ४. मरीचि, ५. ज्वालिनी, ६. रुचि, ७. सुषुम्ना, ८. भोगदा, ९. विश्व, १०. रोधिनी, ११. धारिणी, १२. क्षमा - ये १२ सौरा (सूर्य की) वसुप्रदा कलाएँ हैं, जो क भ से आरम्भ होकर ठ-ड में समाप्त होती हैं।
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